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  NGO अमोघ फाउंडेशन  ·  सार्वजनिक परामर्श  ·  मार्च 2026

शिक्षा नवोदय

भारत के लिए एक सम्पूर्ण शिक्षा पुनर्जागरण — जन्म से लेकर जीवनभर सीखने तक, हर पड़ाव को नए सिरे से सोचना — NGO अमोघ फाउंडेशन का प्रस्ताव।
📋 मसौदा v1.0 🎓 7 शिक्षा चरण 📌 8 मूल सिद्धांत 🗺 10 वर्षीय योजना ⚖️ समानता की गारंटी
11 भारत के नागरिक
जो हस्ताक्षर कर चुके हैं
यह क्यों ज़रूरी है

भारत का शिक्षा संकट — वह सच जो हम नहीं बोलते

हर सुबह भारत में 25 करोड़ से ज़्यादा बच्चे स्कूल जाते हैं। कुछ उम्मीद लेकर, कुछ आदत से, और कुछ इसलिए क्योंकि कोई दूसरा रास्ता नहीं है — इसलिए नहीं कि स्कूल सच में कुछ मूल्यवान दे रहा है। हमारी शिक्षा व्यवस्था में कुछ बुनियादी तौर पर टूटा हुआ है, और हम बरसों से यह नहीं मान रहे।

65%
कक्षा 5 के बच्चे कक्षा 2 की किताब नहीं पढ़ सकते (ASER 2023)
₹6 लाख Cr
कोचिंग उद्योग पर सालाना खर्च — पूरे शिक्षा बजट के बराबर
53%
इंजीनियरिंग स्नातक जो उद्योग के लिए अयोग्य पाए जाते हैं
2.9%
GDP का शिक्षा पर खर्च — 1968 से हर नीति 6% मांगती है
1 करोड़+
बच्चे हर साल माध्यमिक शिक्षा पूरी करने से पहले छोड़ देते हैं

क्या गलत हो रहा है?

📚

रटना, सोचना नहीं

बच्चे 12 साल ऐसे जवाब रटते हैं जो ज़िंदगी में कोई नहीं पूछेगा। सोचने, सवाल करने और बनाने की काबिलियत — जो 21वीं सदी मांगती है — व्यवस्थित तरीके से दबाई जाती है। "क्यों?" पूछने वाले बच्चे को बोर्ड से नकल करने को कहा जाता है।

📝

एक परीक्षा, एक तकदीर

कक्षा 10 या 12 का एक बुरा दिन पूरी ज़िंदगी की राह बंद कर सकता है। 3 घंटे की परीक्षा पर बच्चे का पूरा भविष्य टिका है। इससे डर का एक उद्योग खड़ा हुआ है — ₹6 लाख करोड़ का कोचिंग बाज़ार, जो सिर्फ अमीर ही पूरी तरह खरीद सकते हैं।

👩‍🏫

शिक्षक की उपेक्षा

शिक्षण समाज का सबसे ज़रूरी पेशा है — फिर भी भारत में सबसे कम तनख्वाह और इज़्ज़त वाला। प्रतिभाशाली लोग पढ़ाने नहीं आते। जो आते हैं उन्हें जनगणना, चुनाव ड्यूटी और मिड-डे मील का बोझ दिया जाता है — पढ़ाने के लिए वक्त ही नहीं बचता।

🚧

तीन धाराएं, हज़ारों बंद दरवाज़े

15 साल की उम्र में विज्ञान, वाणिज्य या कला चुनना होता है — और यह चुनाव बाकी पूरी ज़िंदगी तय करता है। 20 साल में बदलना चाहो? लगभग नामुमकिन। यह व्यवस्था मानती है कि किशोरावस्था में इंसान की क्षमता तय हो जाती है — जो क्रूर भी है और वैज्ञानिक रूप से गलत भी।

🏘️

शहर और गांव की खाई

शहर के बच्चे के पास योग्य शिक्षक, डिजिटल संसाधन और ठीकठाक कक्षाएं हैं। 80 किमी दूर के गांव के सरकारी स्कूल में एक शिक्षक पांच कक्षाओं के लिए है, शौचालय काम नहीं करता, किताबें पुरानी हैं। दोनों भारत के नागरिक हैं — समान संवैधानिक अधिकारों के साथ।

💼

डिग्री है, हुनर नहीं

भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट देता है — और स्नातक बेरोज़गारी की दर भी बहुत ऊंची है। नियोक्ता लगातार कहते हैं कि ग्रेजुएट बोल नहीं सकते, अनजानी समस्याएं हल नहीं कर सकते, टीम में काम नहीं कर सकते। हमने सर्टिफिकेट को शिक्षा समझ लिया है।

दूसरे देशों ने कैसे बदला?

ये देश कभी वहीं थे जहां आज भारत है — या उससे भी बदतर। उन्होंने साहसी, व्यापक बदलाव किए। नतीजा: एक पीढ़ी में पूरे समाज का कायाकल्प हो गया।

🇫🇮

फिनलैंड

16 साल तक कोई बड़ी परीक्षा नहीं। शिक्षकों को डॉक्टरों जितनी इज़्ज़त। 7 साल तक खेल ही पाठ्यक्रम। नतीजा: लगातार 20 साल दुनिया में शिक्षा में नंबर 1।

🇸🇬

सिंगापुर

1980 के दशक में औपनिवेशिक रटने-वाली शिक्षा से कौशल-आधारित सोच की शिक्षा में बदलाव। 30 साल तक GDP का 5%+ शिक्षा पर खर्च। आज दुनिया के सबसे समृद्ध और शिक्षित देशों में।

🇩🇪

जर्मनी

द्वैध शिक्षा प्रणाली (Dual System) — छात्र स्कूल में पढ़ते हैं और उद्योग में काम भी करते हैं। नतीजा: दुनिया में सबसे कम युवा बेरोज़गारी और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त व्यावसायिक योग्यताएं।

🇯🇵

जापान

बच्चे 6 साल की उम्र से स्कूल खुद साफ करते हैं। 10 साल तक कोई रैंकिंग परीक्षा नहीं। चरित्र, समुदाय और गहरी महारत पर ध्यान। नतीजा: धरती पर सबसे कुशल और अनुशासित कार्यबल।

🇰🇷

दक्षिण कोरिया

1945 में कोरिया में मात्र 22% साक्षरता थी — आज के कई भारतीय राज्यों से भी कम। 2000 तक लगभग शत-प्रतिशत साक्षरता और Samsung, Hyundai जैसे ब्रांड। इंजन? सार्वजनिक शिक्षा में निरंतर, जुझारू निवेश।

🇪🇪

एस्टोनिया

13 लाख की आबादी वाले इस देश ने एक दशक में विश्वस्तरीय डिजिटल शिक्षा प्रणाली बनाई। हर स्कूल में ब्रॉडबैंड, कक्षा 1 से कोडिंग। आज यूरोप में शिक्षा परिणामों में शीर्ष पर।

🇮🇳 भारत को अभी यह क्यों चाहिए?

भारत एक ऐसे जनसांख्यिकीय मोड़ पर है जो दोबारा नहीं आएगा। 2030 तक हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी कामकाजी उम्र की आबादी होगी — 15 से 64 साल के 100 करोड़ से ज़्यादा लोग। यह हमारा सबसे बड़ा मौका है या सबसे बड़ा संकट — यह पूरी तरह एक बात पर निर्भर है: हमारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता।

अगर हम इस पीढ़ी को अच्छी तरह पढ़ाएं, तो भारत दुनिया का नवाचार इंजन बनेगा। अगर हम रटने, डर और असमानता की पुरानी राह पर चलते रहे, तो बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी, सामाजिक अस्थिरता और बर्बाद मानव क्षमता का सामना करना होगा।

शिक्षा नवोदय कोई इच्छा-सूची नहीं है। यह भारत के भविष्य के लिए एक अस्तित्व की योजना है।

एक नज़र में

शिक्षा नवोदय क्या प्रस्तावित करता है?

🌱

स्कूल 6 साल से — 3 से नहीं

विज्ञान स्पष्ट है: बच्चे 6 साल तक खेलकर सबसे अच्छा सीखते हैं। हर आंगनवाड़ी एक सच्चे विकास केंद्र में बदलेगी — वर्कशीट और रटने की मिनी-कक्षा में नहीं।

👩‍🏫

शिक्षक पहले — हमेशा

शिक्षकों को केंद्र सरकार के श्रेणी-1 अधिकारी के बराबर वेतन। शोध अवकाश, पेशेवर परिषद, और शून्य गैर-शिक्षण कार्य। सर्वश्रेष्ठ दिमाग कक्षाओं में आएं — क्योंकि शिक्षक देश का भविष्य तय करते हैं।

🗂️

पोर्टफोलियो — परीक्षा नहीं

एक दिन की बोर्ड परीक्षा जो बचपन बर्बाद करती है — खत्म हो। बच्चों का मूल्यांकन परियोजनाओं, पोर्टफोलियो, प्रदर्शन और इंटर्नशिप से हो। ₹6 लाख करोड़ की कोचिंग फैक्ट्री बेकार हो जाए।

⚖️

चार समान रास्ते

15 साल की उम्र में चार बराबर रास्तों में से एक: खोज (विज्ञान), अभिव्यक्ति (कला), उद्यम (व्यापार), कारीगरी (व्यावसायिक)। चारों उच्च शिक्षा और सम्मानजनक रोज़गार तक ले जाते हैं।

💻

हर बच्चे के लिए तकनीक

हर सरकारी स्कूल में इंटरनेट, टैबलेट और सौर ऊर्जा। 22 भाषाओं में राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय। बच्चे की अपनी भाषा और गति में AI ट्यूटर। ऑफलाइन-फर्स्ट ताकि कोई ग्रामीण बच्चा पीछे न रहे।

♾️

सीखने की कोई उम्र नहीं

ब्रिज कोर्स, पूर्व अनुभव की मान्यता, शाम की कक्षाएं — बच्चा पालने के बाद वापस आने वाली महिला के लिए, या सर्टिफिकेट चाहने वाले कारीगर के लिए। आजीवन सीखना एक अधिकार बने।

📋 इस दस्तावेज़ का उद्देश्य

यह NGO अमोघ फाउंडेशन द्वारा तैयार किया गया सार्वजनिक परामर्श मसौदा है, जो माता-पिता, शिक्षकों, छात्रों, नीति-निर्माताओं और हर उस नागरिक को संबोधित है जो मानता है कि भारत के बच्चे बेहतर के हकदार हैं। आपकी आवाज़ इस प्रस्ताव को आकार देती है। इसे पढ़ें, सोचें, और नीचे अपना नाम जोड़ें — आपकी सहमति भारत के शिक्षा भविष्य पर आपकी औपचारिक सहमति है।

पूरा प्रस्ताव

नौ उसूल और सात चरण

01

स्कूल 6 साल से शुरू

6 साल तक दिमाग खेलकर बनता है। औपचारिक पढ़ाई छह साल से — तीन से नहीं।

02

घर पहली पाठशाला है

माता-पिता और दादा-दादी पहले शिक्षक हैं। सरकार उनकी मदद करे — मुकाबला नहीं।

03

समझना, रटना नहीं

तथ्य इंटरनेट पर हैं। सोचना, बनाना, करना — यही कक्षा की देन होनी चाहिए।

04

हर हुनर बराबर है

प्लंबर, नर्स, रसोइया — ये छोटे रास्ते नहीं हैं। हर रास्ते में बराबर सम्मान है।

05

कोई दरवाज़ा हमेशा बंद नहीं

15 में कारीगरी चुनी? 22 में इंजीनियर बनना है? ब्रिज करो। आजीवन सीखना गारंटीड है।

06

शिक्षक ही सब कुछ है

अच्छा शिक्षक → अच्छे नतीजे। कोई तकनीक या नीति शिक्षक से बड़ी नहीं।

07

प्रगति, रैंकिंग नहीं

हर बच्चे को उसकी अपनी बढ़त से नापें — दूसरों से नहीं। सहयोग, प्रतिस्पर्धा नहीं।

08

विविधता हमारी ताकत है

22 भाषाएं, हज़ारों परंपराएं — पाठ्यक्रम की सामग्री, बाधाएं नहीं।

09

प्रकृति ही कक्षा है

बाहरी शिक्षा, पर्यावरण जागरूकता और प्रकृति-संरक्षण हर बच्चे की शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा हैं।

इस प्रस्ताव का हर सुधार एक सच्चाई पर टिका है: किसी भी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता उसके शिक्षकों की गुणवत्ता से ऊपर नहीं जा सकती।

  • वेतन समानता — केंद्र सरकार के श्रेणी-1 अधिकारियों के बराबर।
  • नई चयन परीक्षा (NTST) — विषय की गहरी समझ, लाइव कक्षा प्रदर्शन, बाल मनोविज्ञान, डिजिटल शिक्षाशास्त्र।
  • शोध अवकाश — हर 7 साल में एक सेमेस्टर — अध्ययन, शोध या यात्रा के लिए।
  • ग्रामीण पोस्टिंग भत्ता — 25% विशेष भत्ता + गुणवत्तापूर्ण आवास + परिवार का समय।
  • वैधानिक शिक्षक परिषद — बार काउंसिल या मेडिकल काउंसिल की तरह — पेशेवर मानक, शिकायत निवारण।
  • शून्य गैर-शिक्षण कार्य — कोई जनगणना, चुनाव ड्यूटी, या मिड-डे मील। शिक्षक सिर्फ पढ़ाएं।
नया B.Ed कार्यक्रम: 4 वर्षीय एकीकृत डिग्री — विषय महारत + शिक्षाशास्त्र + मनोविज्ञान + तकनीक + अनिवार्य ग्रामीण इंटर्नशिप।

सबसे महत्वपूर्ण सीख स्कूल से पहले होती है। 5 साल तक दिमाग की 90% संरचना बन जाती है।

  • 2 साल से पहले कोई स्क्रीन नहीं। 4 साल से पहले कोई वर्कशीट नहीं।
  • कहानियां सुनाना, गाना, बाहर खेलना और मातृभाषा में रहना।
  • आंगनवाड़ियां सच्चे बाल विकास केंद्रों में बदलें — प्रशिक्षित शुरुआती बचपन विशेषज्ञों के साथ।
  • माता-पिता शिक्षा कार्यक्रम — हर आंगनवाड़ी में साप्ताहिक मार्गदर्शन।
  • पोषण की गारंटी — भोजन, स्वास्थ्य जांच और विकासात्मक स्क्रीनिंग।
नियम: कोई बच्चा 6 साल पूरे होने से पहले कक्षा 1 में नहीं जाएगा। यह अटल है।

एकमात्र लक्ष्य: हर बच्चा कक्षा 2 के अंत तक अपनी मातृभाषा में एक अनुच्छेद समझकर पढ़ सके।

  • कक्षा 1-2 में कोई लिखित परीक्षा नहीं। कोई गृहकार्य नहीं। सिर्फ शिक्षक की नोटबुक।
  • रोज़ कम से कम 90 मिनट बाहर खेल, बागवानी, खोज।
  • बच्चे खुद अपनी कक्षा साफ करें — जापान से सीखी आत्मजिम्मेदारी।
  • कक्षा 2 तक सभी विषय मातृभाषा में। दूसरी भाषा धीरे-धीरे — बातचीत, कहानी और गीत से।
साक्षरता की गारंटी: जो बच्चा कक्षा 2 तक पढ़ नहीं पाता, उसे व्यक्तिगत सीखने की योजना मिलती है — फेल का ठप्पा नहीं।

बच्चा पढ़ने के लिए सीखने से → सीखने के लिए पढ़ने की ओर बढ़ता है। जिज्ञासा रटने की जगह लेती है।

  • विज्ञान प्रयोगों से। गणित असल समस्याओं से। इतिहास बहस और कहानियों से।
  • कला, शिल्प, संगीत, नाटक — मुख्य पाठ्यक्रम, "अतिरिक्त" नहीं।
  • डिजिटल साक्षरता: कोडिंग की बुनियाद, इंटरनेट सुरक्षा, मीडिया समझ।
  • नागरिक शिक्षा: संविधान, अधिकार, स्थानीय सरकार — सरल भाषा में।
  • मूल्यांकन परियोजना पोर्टफोलियो से — कोई रैंक सूची नहीं।

12–15 साल पहचान बनने के साल हैं। मौजूदा व्यवस्था ठीक इसी वक्त रटने के बोझ से जिज्ञासा कुचल देती है।

  • करियर अनुभव: साल में 4 हफ्ते पेशेवरों के साथ — किसान, डॉक्टर, कलाकार, इंजीनियर, कारीगर।
  • उद्यमिता: अपने गांव/शहर की एक असली समस्या पहचानो, समाधान बनाओ — सरकार बीज सहायता देगी।
  • AI और तकनीक साक्षरता — एल्गोरिदम, डेटा अधिकार, डिजिटल नैतिकता।
  • स्वास्थ्य और जीवन कौशल — पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, सहमति, वित्तीय बुनियाद।
  • अनिवार्य सामुदायिक सेवा घंटे — छात्र अपनी स्थानीयता में योगदान करें।

15 साल पर छात्र चार बराबर रास्तों में से एक चुनते हैं — सभी उच्च शिक्षा और सम्मानजनक रोज़गार तक ले जाते हैं।

गंतव्यविषय क्षेत्ररास्ता
IIT / शोध / इंजीनियरिंगविज्ञान, गणित, तकनीक, शोध🔬 खोज
लेखन / शिक्षण / पत्रकारिताकला, मानविकी, भाषाएं, मीडिया🎨 अभिव्यक्ति
CA / MBA / उद्यमिताव्यापार, वाणिज्य, वित्त, कानून💼 उद्यम
सम्मानजनक प्रत्यक्ष रोज़गारनर्सिंग, बिजली, रसोई, IT, निर्माण🔧 कारीगरी
रास्ता बदलना हमेशा संभव है — 3–6 महीने के ब्रिज कोर्स से किसी भी समय रास्ता बदला जा सकता है। कोई रास्ता कभी बंद नहीं होता।

उच्च शिक्षा में बदलाव: सीखना और काम करना साथ-साथ। जर्मनी की द्वैध प्रणाली, भारत के लिए अनुकूलित।

  • कम से कम 4 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप — असल संस्थाओं में, नकली लैब में नहीं।
  • Capstone परियोजना: हर छात्र एक असल दुनिया की समस्या हल करे — यही उनका स्नातक कार्य।
  • कारीगरी रास्ता: सप्ताह में 3 दिन काम + 2 दिन कॉलेज + वजीफा।
  • विश्वविद्यालय प्रवेश पोर्टफोलियो + साक्षात्कार + इंटर्नशिप रिपोर्ट से — 3 घंटे की परीक्षा से नहीं।
  • कोडिंग, AI साक्षरता, उद्यमिता — सभी कोर्सों में अनिवार्य मॉड्यूल।

शिक्षा 20 साल में खत्म नहीं होती। इस ढांचे में आजीवन सीखना एक संवैधानिक अधिकार है।

  • वापसी प्रणाली: किसी भी उम्र में औपचारिक शिक्षा में वापस आएं — शाम, सप्ताहांत, ऑनलाइन।
  • पूर्व अनुभव की मान्यता (RPL): 15 साल के प्लंबर का अनुभव अकादमिक क्रेडिट में बदलता है।
  • ब्रिज कोर्स: जीवन के किसी भी पड़ाव पर 3–6 महीने में पूरी तरह क्षेत्र बदलें।
  • विवेक फेलो: सेवानिवृत्त विशेषज्ञ, वरिष्ठ कारीगर और पारंपरिक ज्ञान के वाहक — स्कूलों में वेतनभोगी, मान्यता प्राप्त गुरु।

₹60,000 करोड़ का कोचिंग उद्योग इसलिए है क्योंकि एक परीक्षा बच्चे की ज़िंदगी तय करती है। हम यह बदलते हैं।

मूल्यांकन कैसेचरण
कोई औपचारिक मूल्यांकन नहीं — केवल माता-पिता-शिक्षक बातचीतगृह वर्ष (0–6)
शिक्षक की अवलोकन नोटबुक — कोई लिखित परीक्षा नहींमूल वर्ष (6–9)
परियोजना पोर्टफोलियो — कोई रैंक सूची, कोई प्रतिशत नहींविकासशील वर्ष (9–12)
कौशल-आधारित कार्य + सामुदायिक परियोजनासंवर्धन वर्ष (12–15)
50% पोर्टफोलियो + 50% मॉड्यूलर परीक्षा — जब छात्र तैयार होमोहनीय वर्ष (15–17)
इंटर्नशिप + Capstone + पोर्टफोलियो — कोई एक दिन की बोर्ड परीक्षा नहींविशेषज्ञता वर्ष (17–20)
  • सार्वभौमिक बुनियादी ढांचा: हर सरकारी स्कूल में ब्रॉडबैंड, टैबलेट, सौर ऊर्जा। अटल।
  • राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षण पुस्तकालय (NDLL): मुफ्त, 22 भारतीय भाषाओं में, पूरी तरह ऑफलाइन काम करे।
  • AI ट्यूटर: बच्चे की अपनी भाषा और गति में व्यक्तिगत सीखना — शिक्षक का पूरक, विकल्प नहीं।
  • शिक्षक तकनीक प्रशिक्षण — स्कूल कैलेंडर में बनाया गया, वैकल्पिक कार्यशाला नहीं।
एस्टोनिया ने एक दशक में विश्वस्तरीय डिजिटल शिक्षा प्रणाली बनाई। भारत के पास बड़ा प्रतिभा आधार, कम लागत और कहीं ज़्यादा प्रेरणा है। यह बस बाकी था।
  • दिव्यांग बच्चे: प्रत्येक 5 स्कूलों पर 1 विशेष शिक्षक, व्यक्तिगत सीखने की योजना, पूर्ण सहायक तकनीक।
  • लड़कियां: साफ अलग शौचालय, मासिक स्वास्थ्य शिक्षा अनिवार्य पाठ्यक्रम में, ड्रॉपआउट रोकने के लिए आर्थिक सहायता।
  • ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र: मातृभाषा में शिक्षा, स्थानीय ज्ञान पाठ्यक्रम में, आवासीय छात्रावास, ग्रामीण शिक्षक भत्ते।
  • प्रतिभाशाली बच्चे: बिना पूर्वाग्रह के पहचानें, गुरुओं से जोड़ें, उनकी जिज्ञासा से मेल खाने वाले संसाधन दें।
  • प्रवासी बच्चे: सहज स्थानांतरण प्रणाली — परिवार के प्रवास के कारण कोई बच्चा एक साल नहीं गंवाएगा।
मुख्य कार्यसमय-सीमाचरण
सार्वजनिक प्रकाशन, जिला टाउन हॉल, ऑनलाइन परामर्श, कानूनी मसौदा शुरूवर्ष 1शून्य कदम
50 जिलों में पायलट, नया B.Ed शुरू, आंगनवाड़ी सुधार, NDLL अल्फावर्ष 1–3नींव
राष्ट्रीय विस्तार, नई परीक्षा प्रणाली, द्वैध प्रणाली पायलट, शिक्षक परिषद गठितवर्ष 3–6संरचनात्मक सुधार
सभी 7 चरण चालू, राष्ट्रीय पोर्टफोलियो प्रणाली, RPL प्रणाली लाइववर्ष 6–10पूर्ण लागू
स्वतंत्र प्रगति ऑडिट ऑनलाइन प्रकाशित — सभी डेटा सार्वजनिकहर सालनिरंतर
वित्त पोषण: भारत GDP का 2.9% शिक्षा पर खर्च करता है। 1968 से हर नीति 6% मांगती है। फिनलैंड, सिंगापुर, कोरिया ने परिवर्तन के दौरान 5%+ खर्च किया। शिक्षा में निवेश खर्च नहीं — किसी राष्ट्र का सबसे ज़्यादा फायदेमंद निवेश है।

भारत के वे नागरिक जिन्होंने हस्ताक्षर किए

वे भारतीय जिन्होंने NGO अमोघ फाउंडेशन के शिक्षा नवोदय प्रस्ताव पर औपचारिक सहमति दी है।
Nishant Srivastava
Civilian, Teacher, Student, Parent. All · Kanpur, Uttar Pradesh
21 Mar 2026, 12:06 PM
""Education is the key to unlock the golden door of freedom.""
Nidhi chadha
Teacher · Kanpur
21 Mar 2026, 11:10 AM
"मेरे विचार में यह बहुत अच्छा प्रस्ताव है किंतु साथ ही यह सुझाव देना चाहूंगी कि जो शिक्षक शिक्षा से अपना संविधान करना चाहे गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए उनके लिए भी कार्य किया जाए"
Gulfishan parveen
नागरीक् · Kanpur
18 Mar 2026, 09:36 AM
"शिक्षा नवोदय — अमोघ फाउंडेशन की यह पहल आज की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक जरूरी चेतावनी और मजबूत समाधान दोनों है। जब बुनियादी शिक्षा ही कमजोर हो, तो बदलाव अब विकल्प नहीं, आवश्यकता है। मैं इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन करती हूँ और सभी से अपील करती हूँ कि इसे समझें, समर्थन दें और एक सशक्त जनआंदोलन का हिस्सा बनें। धन्यवाद। 🙏"
Garima Shukla
Parent , Teacher · Kanpur UP
18 Mar 2026, 09:25 AM
Amita
Counsellor · Kanpur
15 Mar 2026, 08:45 AM
"Education is the base of any society"
Omprakash tulshyan
Father · Kanpur up
15 Mar 2026, 08:13 AM
Kamesh Bajpai
Parent, Teacher · Kanpur
14 Mar 2026, 05:15 AM
"Need of the Day"